Thursday, 9 June 2016

गुणकारी हरा धनिया

 हरे धनिये का प्रयोग सब्जियों का स्वाद और सुंदरता बढ़ाने के लिये हम अक्सर करते हैं । सूखे धनिया का प्रयोग मसालों में जमकर किया जाता है, लेकिन क्या हम धनिया के औषधीय गुणों से भी परिचित हैं । चाहे हरा धनिया हो या फिर सूखा धनिया दोनों के ही अपने औषधीय गुण हैं । अनजाने में ही सही पर इसका सेवन हमें कई बीमारियों से दूर रखता है । आईये आज जानते हैं धनिया किस किस बीमारी में काम आता है और हम घर बैठे अपने स्वास्थ्य की देखभाल में किस तरह से धनिया प्रयोग कर सकते हैं ।

1.    आंखों की देखभाल 


सूखा धनिया दो चम्मच 1 गिलास पानी पर उबाल लें । जब यह 1 कप बचा रह जाये तब इसे छान कर ठंडा कर के शीशी में रख लें । इस पानी की दो बूंद आंखों में टपकाने से ऑंखों की जलन,दर्द, पानी गिरना, बिलनी जैसी दिक्कतों में राहत मिलती है ।

2.    गर्भावस्था में मितली आना  


गर्भावस्था के शुरूआती महीनों में गर्भवती महिला को उल्टियॉं आती हैं । ऐसे समय में आधे चम्मच सूखे धनिया में 1 चम्मच मिश्री मिला कर काढ़ा बना कर थोडी थोड़ी देर में पिलाना चाहिये । इससे जी मिचलाना, उल्टियों मे राहत मिलती है ।

3.    स्वस्थ पाचन क्रिया 


हरे धनिये की पत्तियों के साथ, लहसुन, अदरक, हरा मिर्च, नींबू का रस, पुदीना, नमक, व इमली मिला कर कूट कर इसकी चटनी बना लें । मिक्सर का प्रयोग न करें नही ंतो वह बिल्कुल ही पीस देगा और चटनी पानी पानी हो जायेगी । इस चटनी से पाचन क्रिया सही रहती है ।

4.    पित्त बढ़ने  से जी मिचलाना 


पित्त बढ़ने से अगर जी मिचलाता हो हरा धनिया पीसकर दो चम्मच रस पिलाने से जी मिचलाना कम हो जाता है ।

5.    त्वचा पर पित्ती निकलना


कभी कभी अलर्जी या अत्यधिक गर्मी के कारण त्वचा पर पित्ती निकल आती है । इनमें खुजली भी खूब होती है और मरीज खुजला खुजला कर परेशान हो जाता है और त्वचा लाल पड़ जाती है । ऐसे में हरे धनिया के रस में शहद और रोगन गुल को बराबर मात्रा में मिला कर लेप करने से राहत मिलती है ।

6.    लू लगना 


अक्सर मई जून की गर्मी में गर्म हवा से लू लग जाती है । ऐसे में हरा धनिया और पुदीना पीस कर एक गिलास पानी में एक चम्मच चीनी और काला नमक मिला कर पीने से आराम मिलता है । 


7.    डाइबिटीज में लाभ


अगर शुगर लेवल बढ़ा हुआ है तो सवेरे सवेरे खाली पेट एक गड्डी हरा धनिया मिक्सर में पीस कर एक गिलास पानी में मिला कर छान लें और पी लें । कुछ दिनों के भीतर शुगर लेवल नारमल हो जाता है ।

8.    मासिक धर्म में अत्यधिक स्राव


मासिक धर्म में अत्यधिक स्राव होने पर 2 चम्मच सूखा धनिया आधा लीटर पानी में उबालें । जब यह एक गिलास रह जाये तब इसमें 1 चम्मच मिश्री मिला कर ठंडा कर के छान कर पी लें । यह प्रयोग कुछ दिनों तक करने पर राहत मिलती है ।

9.    भोजन में अरूचि 


खाना पचता न हो, पेट भर खाना न खा पाते हों, खाना देख कर खाने का मन न करें । ऐसे में सूखा धनिया, छोटी इलाइयची, काली मिर्च तीनों 20-20 गा्रम  लेकर पीस कर शीशी मंे रख लें । 1/4 चम्मच यह चूर्ण 1 चम्मच शहद के साथ सुबह शाम लेने से पेट खुलता है और पाचन क्रिया भी ठीक होने लगती है ।

10.    गैस अधिक बनना

अधिक गैस बनने पर 2 चम्मच सूखा धनिया आधा लीटर पानी में उबालें । जब यह एक गिलास रह जाये तब इसे छान कर तीन भाग कर लें और सुबह दोपहर शाम दिन में तीन बार इसका सेवन करें । गैस में  आराम मिल जाता है ।

11. श्वास रोग में


अगर रोगी को खांसी हो, दमा हो, सांस फूलती हो तब ऐसे में सूखा धनिया पीस कर मिश्री मिला कर रख लें । इसे चावल के मांड के साथ आधा चम्मच मिला कर रोगी को खिलायें । कुछ दिनों तक इसका प्रयोग करने से श्वास रोग में आराम मिलने लगता है ।
 
12.    पेशाब में जलन


पेशाब में जलन होने पर आधा चम्मच सूखा धनिया आधे चम्मच त्रिफला के साथ एक गिलास पानी में भिगो कर रात को रख दें । सवेरे खाली पेट इस पानी को छान कर पीने से पेशाब की जलन शांत हो जाती है ।


Thursday, 26 May 2016

नई बहू कैसे एडजस्ट करे ससुराल में !

किसी भी नई नवेली बहू के लिये  ससुराल में नया जीवन शुरू करना अनोखा और रोमांच से भरपूर अनुभव होता है । पता नहीं कैसे लोग होंगे वहॉं ? कैसा स्वभाव होगा सबका ? कैसे सबको खुश कर पाउंगी ? पिता के घर की सोन चिरइया अचानक एक दिन बाद.... एक नये घर, नये परिवार में पहुंच जाती है, जहॉं उसे नई जिम्मेदारियों के साथ सभी के साथ समन्वय बना कर चलना है । वाकई यह एक बड़ी मानसिक और शारीरिक चुनौती होती है । सभी रिश्ते नातों से ऊपर पति परमेश्वर को समझना, उनकी रोज की जरूरतों और ससुराल की दिनचर्या में ढल जाना किसी भी नई नवेली दुल्हन के लिये आसान नहीं होता है । हमारी कई सखियॉं जो कि आने वाले समय में दुल्हन बनने वाली हैं या जिनकी अभी नई नई शादी हुयी है, उनके लिये इस लेख में कुछ मार्गदर्शक टिप्स हैं जो उन्हें ससुराल में  नया जीवन शुरू करने में उनकी मदद करेंगी  ।

ससुराल में पहले दिन से लेकर एक साल तक का समय आपको इस नये सफर को समझने के लिये काफी होता है । पहले दिन से ही आपको नये जीवन के नये अनुभव होंगे और आपका प्रशिक्षण भी शुरू हो जायेगा । 


१.   सबसे पहले तो आप मानसिक रूप से तैयार हो जाये कि अब यही आपका घर और परिवार है और यहीं आपको अपना जीवन हंसी खुशी बिताना है । 


२.   खुश रहें और ससुराल में मिले नये रिश्तों (ननद, भाभी, बुआ, सास, देवर, जेठानी आदि) का आनंद उठायें ।

३.  शुरूआत के कुछ दिन रस्मों रिवाज में बीत जाते हैं । मायके में आपको इनकी झलक मिली होगी परिवार में हुयी शादियों में । ये रस्मों रिवाज हमारे समाज और संस्कृती का हिस्सा हैं । खुशियों के पल भी इनमें छिपे रहते हैं ।


४.   नई बहू का पहला इम्तिहान किचन में होता है । इसके लियेे हर युवती ने पहले से कुछ न कुछ सोच रखा होता है । जो अपकी फेवरेट रेसिपी हो वहीं आजमाईये । 


५.  पति को समझने में काफी समय लग जाता है । उनकी आदतें, दिनचर्या, व्यवहार, पसंद-नापसंद, आदि । उनके साथ बातचीत में उनके बारे में धीरे धीरे सब कुछ जानना चाहिये और ससुराल और पति की दिनचर्या में ढलने का प्रयास करना चाहिये । जैसे सवेरे मॉर्निग वॉक या एक्सरसाइज का समय, ऑफिस की तैयारी, ब्रेकफास्ट, लंच तैयार करने में । इन सब कामों के लिये आपको अपनी दिनचर्या ससुराल के हिसाब एडजस्ट करनी चाहिये ।

कुछ दिनों के अंदर आपका ससुराल के सभी सदस्यों से परिचय हो चुका होगा । अब आपको आगे इस तरह से व्यवहार करना चाहिये ।


६.   पति को कोयी सुझाव देना हो तो विनम्रता के साथ देना चाहिये । 


७.   अगर कहीं घूमने का प्लान हो तो वापसी में घर वालों के लिये उनकी पसंद के हिसाब से तोेहफे ले जाने चाहिये । जरूरी नहीं है कि तोहफे मंहगे हों ।


८.  हर घर के अपने नियम कायदे होते हैं । नई बहू को उन्हीं नियमों के हिसाब से खुद को ढालना होता है ।


९.  सेक्स वैवाहिक जीवन का एक अहम हिस्सा होता है । इसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिये । अगर कोयी दिक्कत या हिचक है तो डॉक्टर या काउंसलर से मिलने में कोयी हर्ज नहीं है ।


१०.   विवाह के बाद पति के मम्मी पापा आपके भी मम्मी पापा होते हैं । इनके साथ आपको लंबा समय बिताना है इसलिये रिश्तों में मधुरता और प्रेम बनाये रखना चाहिये । अपनी तरफ से कोयी काम न करें जिससे उन्हें ठेस लगे । 


११.   घर के सदस्यों के बारे में बहुत जल्दी में कोयी नकारात्मक राय न कायम करें । 


१२.  घर के सभी सदस्यों की पसंद नापसंद, उनकी हॉबी, विचार और क्वालिटी जानने का प्रयास करें ।


१३.  एक डायरी में सबके जन्मदिन, एनिवर्सरी इत्यादी नोट करके रखें और उस दिन उन्हें विश जरूर करें ।


१४.  जब तक न मांगी जाये अपनी राय न दे । राय दे भी तो विनम्रता के साथ ।


१५.  अगर घर में आपको कोयी पसंद नहीं करता है या उससे आपकी नहीं बन रही है तो उससे अधिक न  उलझें  । याद रखिये क्रोधपुरुष को समाज स्वीकार कर लेता है पर क्रोधी महिला को वह नहीं पचा पाता  है.


१६.  सास और बहू का रिश्ता कहीं कहीं तनावपूर्ण हो जाता है । यहॉं जनरेशनगैप की भी दिक्कत होती है । ऐसा होने पर जरूरी नहीं है कि आप भी पलट कर जवाब देने लगें । अगर किसी बात पर या आपकी गलती की वजह से कोयी नाराज है तो माफी मांगकर रिश्तों को फिर सामान्य करने में कोई बुराई नहीं है ।


१७.   अगर किसी ने आपका अपमान कर दिया है तो बदला लेने की भावना न पनपने दें । माफ कर देने से इंसान बड़ा बनता है और दूसरे को भी देर सबेर अपनी गलती का एहसास होता है । 


१८. अगर किसी के साथ दिक्कत महसूस कर रही हैं तो अपने पति और सास ससुर को इसकी जानकारी दें ।


१९.  कोयी भी बड़ा निर्णय लेने के पहले सास ससुर और घर के बड़ों से राय सलाह जरूर करें ।


२०.  शादी के साल भर बाद आप बच्चा प्लान कर सकती हैं । एक साल बाद आप परिवार में एडजस्ट हो चुकी होंगी और नई जिम्मेदारियों के तैयार भी । फाइनेंशियल जरूरतों और उम्र को ध्यान में रखते हुये आप बच्चे की प्लानिंग कर सकती हैं । वैसे बच्चे 24 से 30 साल के बीच हो जाने चाहिये । ज्यादा उम्र के बाद बच्चा होने में चिकित्सकीय कठिनाईयॉं होती ती हैं । 

२१. अगर आप वर्किंगवोमेन हैं या आप और आपके पति किसी  दूसरे शहर में  रहते हैं और सास ससुर दूसरे शहर में तो एक-दो हफ्ते में मिलते रहना चाहिये और साथ भोजन करना चाहिये । वीकेंड पर घूमने का प्लान बना सकते हैं सबके साथ । इससे परिवार में खुशियॉं बनी रहती हैं और रिश्तों में गर्माहट रहती है ।


पुरूषों के बनिस्पत महिलाओं का वैवाहिक जीवन अधिक चुनौतियों और जटिलताओं से भरा होता है । महिला को अपना घर छोड़ कर ससुराल आना पड़ता है और ससुराल के हिसाब से एडजस्ट होना पड़ता है । ससुराल के सदस्यों का मान रखना पड़ता है और तमाम मानसिक और शारीरिक श्रम करना पड़ता है । 


कुछ चीजें नहीं करनी चाहिये नई बहू को ।


१.  पति के साथ बहुत कैजुअली नहीं बिहेव करना चाहिये । हालांकि पति पत्नी में प्रेम का रिश्ता होता है पर पति के अहं को ठेस लगे ऐसे भी नहीं होना चाहिये ।


२.  सभी को सम्मान व प्यार देने का प्रयास करें और पलट कर जवाब नहीं देना चाहिये ।


३. एक गलती जो अमूमन बहुएं करती है, वह है, ससुराल और मायके की तुलना बात बात पर नहीं करनी चाहिये ।


४.  अपने स्वास्थय और फिटनेस का भी ख्याल रखना चाहिये । 


५.   लड़ाईयॉं, नोकझोक, मनमुटाव कभी न कभी पति पत्नी के बीच होता ही है, लेकिन एक बात हमेशा याद रखियेगा । दुनिया में एक पति पत्नी का ही रिश्ता होता है जो सबसे लंबे समय तक चलता है । वक्त के साथ दूसरे रिश्ते नाते खत्म हो जाते हैं लेकिन पति पत्नी अंत तक साथ निभाते हैं । इसलिये इस रिश्ते में मधुरता हमेशा बनाये रखनी चाहिये । किसी के बहकावे में आकर इस रिश्ते को नष्ट करने के बारे में सोचना जीते जी जीवन नर्क बनाने के समान है । यकीन मानिये दूसरी शादियॉं करने वाले उतने सुखी नहीं होते हैं जितना पहली शादी को निभा ले जाने वाले । लड़ाईयॉं, नोकझोक भी जरूरी हैं लेकिन इनका मजा तब दुगना हो जाता है जब आप प्यार मनुहार से उन्हें थोड़ी ही देर में मना लें । इसमें कोयी हार जीत नहीं होती है । पति पत्नी के बीच कोयी इगो नहीं आना चाहिये । सिर्फ प्यार होना चाहिये । लड़ाईयों का सिर्फ 20 20 मैच खेलियेगा, वन डे खेलियेगा पर कभी भी लड़ाई, मनमुटाव को दूसरे दिन मत ले जाईयेगा । बहुत मजा आयेगा हार के बाद जीतने में और जीतने के बाद हारने में । पति पत्नी अर्धनारीश्वर होते हैं । एक दूजे के बिन अधूरे । कभी अधूरे न रहिये । संपूर्णता में ही शक्ति है और आनंद । 


Saturday, 30 April 2016

दाद-खाज, खुजली का कारण और घरेलु इलाज

दाद-खाज या खुजली त्वचा की बीमारी है । कभी न कभी हर एक व्यक्ति जीवन में इस बीमारी का शिकार होता है । किसी पब्लिक प्लेस पर बार बार शरीर खुजलाना हंसी का पात्र बना देता है । बहुत बार यह गर्मी और उमस के मौसम में पसीने के कारण शुरू होती है । मुख्यतः जांघों के बीच या फिर बांहों के बगल में, पीठ में इत्यादि । बहुत बार जोर से या अधिक खुजाला देने के कारण त्वचा कट जाती है और स्थिति गंभीर हो जाती है । सामान्य चर्म रोग की स्थिति में घर पर मौजूद औषधियों से हम इलाज कर सकते हैं पर स्थिति गंभीर हो तो डाक्टर से सलाह लेने में देर न करनी चाहिये । आईये देखते हैं कि खुजली या दाद खाज की क्या क्या वजहें होती हैं ।


दाद खाज और खुजली के आम कारण 

 

१.   कई बार यह अलर्जी के कारण होती है । ऐसे में शरीर पर लाल चकत्ते उभर आते हैं और   उनमें अत्यधिक खुजली होने लगती है ।

२.  मच्छर या दूसरे कीड़ों के काट लेने से ।

३.  मौसम में बदलाव होने से ।

४.  मानसिक तनाव के कारण भी ऐसा होता है ।

५.  त्वचा सूखी होने से ।

६.  अत्यधिक पसीना आने के कारण।

७.  साफ कपड़े न पहनने के कारण ।

८.   अंतः वस्त्रों का साफ न होने कारण ।

९.   गीले कपड़े पहनने के कारण ।

१०.  रोज  न नहाने के कारण ।

११.  फंगल इनफेक्शन के कारण ।

१२.  सिर में जूं या रूसी के कारण ।

१३.  नहाने का साबुन अच्छा न होने के कारण ।

१४.  त्चवा में संक्रमण के कारण ।

१५.  पेट साफ न होने, कब्जियत होने, खून दूषित होने के कारण ।

१६.  अधिक तेल, मसालेदार भोजन के कारण ।


दाद-खाज, खुजली के कुछ घरेलु इलाज


१.     दाद होने पर गुलकंद के साथ दूध पीने से राहत मिलती है ।

२.    अजवाइन के पानी से दाद को धोने से आराम मिलता है ।

३.    लाल गाजर के बुरादे को सेंधा नमक के साथ सेंक कर गरम गरम दाद पर डालने से आराम मिलता है ।

४.    केले के गूदे में नींबू का रस मिलाकर दाद पर लगाने से दाद मिटने लगता है ।

५.    कच्ची हल्दी का लेप दाद पर दिन में कई बार लगाने से भी राहत मिलती है ।

६.   नींबू का रस दाद में  लाभदायक होता है । दाद पर नींबू रगड़ने से दाद कुछ दिनों में दूर हो जाता है । दाद पर नींबू लगाने से जलन होती है ।

७.   दाद-खाज पर अलसी या नारियल का तेल कपूर के साथ लगाने पर भी आराम होता है।

८.   नियमित गाजर का जूस पीने से भी खुजली में आराम मिलता है ।

९.   आधी चम्मच काली मिर्च एक चम्मच गाय के घी में मिलाकर लगाने से खुजली दूर होती है ।

१०. सरसों के तेल में थोड़ा सा गंधक मिलाकर नहाने के पहले 15 मिनट तक लगा कर छोड़ दें फिर 15 मिनट बाद नहा लें ।

११.  तुलसी की पत्तियों को मसल कर उनका रस निकाल लें और उसमें सेंधा नमक मिलाकर खुजली वाले स्थान पर लगायें ।

१२.  रोजाना खाली पेट एक चम्मच नीम का रस एक चम्मच शहद के साथ लेने से भी खुजली की समस्या दूर होती है ।

१३.  नीम की पत्तियों को पीस कर दही के साथ दाद पर लगाने से दाद दूर होता है ।

१४.   खुजली के स्थान पर बर्फ लगाने से भी राहत मितली है ।

१५.   सेब का सिरका प्रभावित स्थान पर लगाने से भी आराम मिलता है ।

१६.   ऐलूविरा का गूदा खुजली वाले स्थान पर लगाते रहने से आराम मितला है और कुछ दिनों में यह समस्या दूर हो जाती है ।

१७.   एक चम्मच पिसा हुआ चिरायता रात को एक शीशे की गिलास में पानी भर कर  रख दें । सवेरे उस पानी को छान कर दिन में तीन बार एक एक कप पीयें । यह खून साफ करता है और बहुत से रोगों को भी दूर करता है ।

 

खुजली व दाद में कुछ सावधानियॉं 

 


१.     खुजली या दाद होने पर साफ सफाई का ध्यान रखना चाहिये ।

२.    नियमित रूप  से स्नान आदि करना चाहिये ।

३.    खुजली वाले स्थान को नंगे हाथों से नहीं छूना चाहिये बल्कि एक साफ कपड़े से उसे हल्के हाथों से सहलाना चाहिये ।

४.    साबुन ऐसा होना चहिये जिसमें मॉस्चराइजर अधिक हो ।

५.    खुजली वाले स्थान को ठंडे पानी से साफ करना चाहिये ।

६.    अंतःवस्त्रों की साफ सफाई बहुत जरूरी है । कई बार गीले अंतःवस्त्र पहनने से फंगल इंफेक्शन हो जाता है ।


Friday, 15 April 2016

शुगर, मधुमेह या डायबिटीज के घरेलु इलाज और सावधानियॉं


शुगर, मधुमेह या डायबिटीज एक ही बीमारी के अलग अलग नाम है । यह बीमारी बड़ी तेजी से आज भारत के शहरी इलाकों में पांव पसार रही है । आज 35 से 40 साल की उम्र आते आते शहरी युवा इस बीमारी की चपेट में आ रहे हैं । मुख्यतः यह बीमारी शरीर में इंसुलिन न बनने के कारण पनपती है लेकिन इस बीमारी को आज हम खुद दावत दे रहे हैं । हमारा बिगड़ा खान-पान और रहन सहन पैंक्रियाज को निष्क्रीय कर दे रहा है जिससे शरीर में इंसुलिन बनना कम हो जाता है या फिर बंद हो जाता है जिसके दुष्परिणाम शुगर की दवाएं या फिर इंसुलिन लेनी पड़ती हैं । इंसुलिन हमारे शरीर में भोजन द्वारा पैदा हुये ग्लूकोज को रक्त के द्वारा शरीर की लोखों कोशिकाओं में पहुंचाता है और उन्हें ऊर्जा प्रदान करता है ।


दवाओं के अपने साइड एफेक्ट हैं । शुगर अपने आप में कोयी रोग नहीं है पर यह शरीर को कमजोर करता जाता है और अगर इस पर नजर नहीं रखी गयी तो यह बहुत ही घातक सिद्ध होता है । आज डायबिटीज या शुगर से बचने के लिये हमें अपने खान पान और नियमित दिनचर्या पर ध्यान देना होगा । अगर आज हम नियमित रूप से व्यायाम करें, मार्निंग वाक करे, कुछ योगा करें और खान पान में मैदे से बनी चीजों का त्याग करदें तो इस बीमारी से बचाव मुश्किल नहीं है । मोटे रूप में अगर समझना चाहे तो मोटापा और शुगर दोनो लगभग एक दूसरे के पयार्यवाची हैं । अगर मोटापे से दूरी बनाये रखेंगे तो शुगर भी आप से दूर रहेगा।


डायबिटीज के लक्षण 

१.    पेशाब का जल्दी जल्दी आना ।

२.    त्वचा में खुजली होना ।

३.    आंखों से धुंधला दिखाई देना ।

४.    पैरों का सुन्न हो जाना ।

५.    प्यास अधिक लगना ।

६.    वजन कम होते जाना ।

७.    शरीर में अगर कहीं घाव हो गया हो तो घाव का जल्द न भरना ।

८.    थकान और कमजोरी लगना ।

९.    फोड़े फुंसियां बार बार निकलना ।

10.   यौन क्रियाओं में शिथिलता ।

११.   शरीर में सूजन आदि ।

 



डायबिटीज में कुछ घरेलु और आयुर्वेदिक औषधियॉं बड़ी कारगर हैं । आईये इनके बारे में जानते हैं ।

 

१.    डायबिटीज की बीमारी में व्यायाम और सुबह शाम की वॉक बेहद जरूरी है ।

२.  योगासनों से इस बीमारी में लाभ होता है । पेट से जुड़े आसन और प्राणायाम को अपने नियमित व्यायाम का हिस्सा बनायें ।

३.  जौ और चने का सेवन मधुमेह में लाभदायक सिद्ध होता है ।

४.  मेथीदाने को रात में शीशे के बर्तन या गिलास में पानी के साथ भिगो दें और सवेरे इसका पानी छान कर पी ले और मेथी दाने का भी दिन में कई बार सेवन करें ।

५.  चिरायते की पत्तियो का चूर्ण आधा चम्मच शीशे के गिलास में पानी के साथ रात में भिगो दें । सवेरे इस पानी को एक कप छान कर पी लें । बचे हुये पानी को भी दिन में पीयें । ये बड़ी तेजी से शुगर डाउन करता है ।

६.  मधुमेह में जामुन बहुत फायदेमंद है । जामुन के साथ साथ इसकी गुठलियॉं भी मधुमेह मे काम करती हैं । गुठलियों को सुखा कर इनका चूर्ण बनालें । आधा चम्मच चूर्ण आधी गिलास पानी में उबाल लें और ठंडा कर के दिन में 2 से 3 बार पीयें ।

७.  नीम की पत्तियों का चूर्ण पिसे हुये जीरे और अजवाइन के साथ एक चम्मच दिन में  कई बार  पानी के साथ ले सकते हैं ।

८.  करेले का जूस मधुमेह में लाभदायक होता है । करेला सब्जी में भी ले सकते हैं ।

९. चीनी और चीनी से बनी मिठाइयों से दूर रहें । चीनी जिस तरह से बनाई जाती है उसमें कई तरह के पेस्टिसाइड मिलाये जाते हैं जो शुगर और दूसरी बीमारियों को दावत देती हैं । इसके बजाये आप प्राकृतिक रूप से जिन चीजों में मिठास होती है उन्हें ले सकते हैं । चीनी का प्रयोग बहुत ही कम कर दें ।

१०. मांड निकाला हुआ चावल का प्रयोग करें, आलू का कम से कम प्रयोग करें, तली चीजों और मसालेदार भोजन से भी परहेज करें ।

११.  हरी धनिया की एक गड्डी मिक्सर में  एक गिलास पानी के साथ पीस लें और सवेरे खाली पेट इसे छान कर पीने से भी शुगर कम होती है ।

१२. अमरूद की 3 या 4 नयी कोमल पत्तियों को रात में एक गिलास पानी में भिगो दे और सवेरे उन पत्तियों को चबा कर वह पानी छान कर पी लें । इससे भी शुगर कम होती है ।

१३. इसी तरह मुलायम ताजी भिण्डियों को भी काट कर एक गिलास पानी में भिगो दे और सुबह उस पानी को छान कर पी लें । यह भी शुगर लो करता है ।

१४. गेंहू के हरे जवारों  का रस हर बीमारी में काम आता है । सवेरे सवेरे आधी गिलास हरे जवारे का रस शुगर लो करता है।

१५. अंवला और एलोवेरा का जूस आधा कप सवेरे सवेरे पीने से भी लाभ मिलता है ।

१६. तुलसी के पत्ते बेहतरीन एंटीआक्सिडेन्ट का काम करते हैं । ये कोशिकाओं को सक्रिय कर देते हैं और मधुमेह में बहुत कारगर हैं । सवेरे सवेरे इनके 5 या 7 पत्ते चबा कर खाने से लाभ होता है ।

१७.  एक चौथाई चम्मच पिसी दालचीनी न सिर्फ वजन कम करती है बल्कि कोलस्ट्राल के साथ साथ शुगर भी कम करती है ।

१८. सहजन जो की सुपर फूड के रूप में जाना जाता है इसके पत्तों के सेवन से भी ब्लड प्रेशर और शुगर में राहत मिलती है ।

१९. सफेद सदाबहार की पत्तियों को पीस कर सवेरे खाली पेट खाने से भी शुगर लेवल कम होता है ।

२०. मेथी, तोरई, लौकी, मूली, टमाटर, गाजर, पुदीना, अदरक, सूरन, करेला, चुकुन्दर, आदि के सेवन से भी मधुमेह में आराम मिलता है. 

२१. सॉफ्ट ड्रिंक्स कभी न पियें. एक दो लीटर की सॉफ्ट ड्रिंक्स की बोतल में तकरीबन १ पाव चीनी घुली होती है. एक बार में चीनी की इतनी अधिक मात्रा हमारे शरीर को कितना नुक्सान पहुंचाएगी इसकी सिर्फ कल्पना ही की जा सकती है.

 

सखियों,  ये कुछ कारगर घरेलु नुस्खे हैं जो मधुमेह की बीमारी में लाभ पहुंचाते हैं । सारे नुस्खों को एक साथ आजमाने की जरूरत नहीं है जो नुस्खा आसानी से आप अपना सकें उसे ही चुने । व्यायाम, 3 से 5 किलोमीटर की वॉक और योगासनों का नियमित प्रयोग भी जरूरी है । बेहतर होगा की किसी डाइटिशीयन से आप अपना डाइट चाट बनवा लें और उसका संकल्पपूर्वक पालन करें ।